एक दृष्टि
 

मैं इस दुनिया में एक ऐसे नये संसार के दर्शन करना चाहता हूँ जिसमें न साम्राज्यवाद हो, न

पूंजीवाद, न धर्म के झगड़े  हों, न जाति के, न धन की महत्ता हो, न पशु बल की, सारी दुनिया

का एक राष्ट्र हो, मनुष्यमात्र की एक जाति हो, नर-नारी का अधिकार और मान समान हो,

सत्य ही ईश्वर हो, विवेक ही शास्त्र  हो, विज्ञान और धर्म परस्पर पूरक हों, सदाचार और

ईमानदारी लोगों का स्वभाव हो, एक का दुःख सब का दुःख हो, सारे विश्व का एक कुटुम्ब हो,

कोई गरीब न हो, सत्यसमाज के द्वारा मैं ऐसे ही नये संसार की तरफ इस संसार को ले जाना

चाहता हूँ सत्यामृत मानवधर्म  शास्त्र में ऐसे ही नये संसार का सन्देश  हैं | नये संसार निर्माण

कर सत्यसमाज को विलीन हो जाना और सत्यामृत मानवधर्म  शास्त्र को अजायबघर में बैठ

जाना है |