एक संगठन

सत्यसमाज, मनुष्यमात्र का वह  संगठन है जो सारी  दुनिया को एक कुटुम्ब बनाना चाहता  है,  जिसमें सब धर्मों और राम, कृष्ण, महावीर बुद्ध, ईसा, मुहम्मद, कार्ल मार्क्स आदि महात्माओं का गुणगान किया जाता है, पर किसी धर्म की, महात्मा की, धर्मपुस्तक की अन्धभक्ति  नहीं की जाती |  अनेक तरह के वहम और अन्धविश्वास नष्ट किये जाते हैं, मनुष्य को निष्पक्ष विचारक बनाया जाता है, उसकी विचारधारा को वैज्ञानिक रंग में रंगा जाता है | उसे और उसके कुटुम्ब  को कुरुढ़ियों के बन्धन से मुक्त किया जाता है |

जाति-पांति के बन्धन टूट जाते हैं | नर-नारी के अधिकारों की विषमता दूर हो जाती है | साम्राज्यवाद और पूंजीवाद का विषापहरण करने के लिए मनुष्य को तैयार किया जाता है | सत्यसमाजी मनुष्यमात्र की हर तरह की तकलीफ और हर तरह की असुविधा को दूर करने के लिए हर तरह की क्रांति के लिए तैयार रहता है | सत्यसमाज का ध्येय लोगों को मरने के बाद स्वर्ग दिलाना नहीं है, किन्तु इसी दुनिया को स्वर्ग बनाना है |

सत्यसमाज के चौबीस जीवनसूत्र

1. विवेकी बनो    2. धर्म समभावी बनो  3. जाति समभावी बनो  4. नर-नारी समभावी बनो  5. अहिंसक बनो   6. सत्य बोलो 7. ईमानदार बनो  8. शीलवान बनो  9.दुर्व्यसन छोड़ो 10. श्रम की प्रतिष्ठा करो 11. अति संग्रह मत करो 12. अतिभोग मत करो 13. बलवान बनो  14. स्वतंत्र और गौरवशाली बनो  15. शिष्ट बनो  16. पुरुषार्थी बनो 17 . संसार को उन्नतिशील बनाओ  18. संयमियों के हाथ में शासन सौपों  19. युद्धों का अन्त हो   20. समाज के सुख साधनों की वृद्धि करो  21. मानव की एक भाषा हो 22. सब देशों का एक मानव राष्ट्र हो  23.  विश्व कुटुम्बी बनो  24. कर्मयोगी बनो